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Tuesday, 17 October 2017

धनतेरस


ललित - सार छंद - 16/12

धन - तेरस हमसे कहता है, बाँट - बाँट कर खाओ
धरती है परिवार - हमारा, सब को यह समझाओ।

भाव भूमि से कर्म - भूमि में, जाकर भाग्य बनाओ
जो बोयेंगे वही - मिलेगा, आम - नीम समझाओ ।

लक्ष्मी जी को नहीं - चाहिए, पूजा हवन - दिखावा
श्रद्धा से बस फूल - चढाओ, छोडो क्षणिक छलावा ।

भूखे को भोजन - करवा दो, सहज  धर्म - अपनाओ
राज - मार्ग पर चलो हमेशा, बच्चों को सिखलाओ।

जहाँ कहीं भी दिखे - अँधेरा, उस घर को उजियारो
उन लोगों का बनो - सहारा, जगमग दीपक बारो ।

हर पौधे में सञ्जीवन है, इनकी सुन लो  महिमा
इनकी गरिमा जानो भाई, मिल सकती है अणिमा।

प्रतिदिन प्राणायाम करें हम, हम भी शतक लगायें
औषधियों का सेवन करके, जीवन सफल बनायें ।

आओ अपना धर्म जान लें, जीवन - सफल बनायें
रोते - रोते हम - सब - आए,  हँसते - हँसते जायें ।