Showing posts with label मातृभूमि. Show all posts
Showing posts with label मातृभूमि. Show all posts

Friday, 19 December 2014

नमामि गङ्गे

जिस नदिया की पूजा करते वह पूजा है अभी - अधूरी
अस्थि - विसर्जन करना  छोडें तब ही होगी पूजा पूरी ।

नारी  देवी  है  कहते  हैं  पर अब  भी शोषण करते हैं
राक्षस बन जाता  है  प्राणी मुँह में राम बगल में छूरी ।

गङ्गा-जल पावन होता था हमने नाली उसे बनाया
आज भी कूडा- फेंक रहे  हैं  मुँह में राम बगल में छूरी ।

मातृभूमि का गौरव गाते पर गरिमा का भाव कहॉ है
गुटका खा- कर थूक रहे  हैं मुँह में राम बगल में छूरी ।

देश  स्वच्छ  करना  है  हमको अब आई  है मेरी बारी
यह जल्दी से नहीं हुआ तो होगी फिर यह हार हमारी ।  

Sunday, 28 September 2014

जन्म - दिवस के पावन - पर्व पर - शहीद भगत सिंह

शहीद भगत सिंह नाम था उनका भारत में वे रहते थे

 

हीन - भाव से बचो बढो तुम प्रेरक बन कर कहते थे ।

 

दफन भले ही हो जायें पर भारत - मॉ  होगी आज़ाद

 

भरत सदृश हम वीर -पुत्र हैं आज़ादी का हो शँखनाद ।

 

गत आगत की नहीं है चिंता वर्तमान हित कर्म करेंगे

 

तब  ही आज़ादी आएगी  बलिदानों  की  प्रथा  गढेंगे ।

 

सिंह शायर सपूत हैं हम तो मातृभूमि हित सदा लडेंगे

 

हरीभरी हो देश की धरती जननी पर प्राणोत्सर्ग करेंगे ।