Tuesday, 21 May 2013

वैदिक वाङ्मय में जल का महत्त्व

" इदमाप: प्र वहत यत् किं च दुरितं मयि
यद्वाहमभिदुद्रोह यद्वा शेष उतानृतम् | | "
ऋग्वेद 10 . 2 . 8 .

हे जल देवता ! मुझसे जो भी पाप हुआ हो, उसे तुम दूर बहा दो अथवा मुझसे जो भी द्रोह हुआ हो , मेरे किसी कृत्य से किसी को पीड़ा हुई हो अथवा मैंने किसी को गालियाँ दी हों, अथवा असत्य भाषण किया हो , तो वह सब भी दूर बहा दो |

जल में अखण्ड प्रवाह , दया , करुणा , उदारता , परोपकार और शीतलता , ये सभी गुण विद्यमान रहते हैं | मनुष्य कितना भी दुखी क्यों न हो , ठंडे जल से स्नान करते ही वह शान्त हो जाता है | जल ही जीवन है | जल मानव को पुण्य - कर्म करने की प्रेरणा देता है |भारतीय संस्कृति पूजा प्रधान है | यहाँ किसी भी कार्य का प्रारम्भ पूजा से होता है और प्रत्येक कार्य का विसर्जन भी पूजा से ही होता है | पूजा हेतु सर्वप्रथम , पवित्रीकरण की आवश्यकता होती है और पवित्रीकरण के लिए जल की आवश्यकता होती है | इसी प्रकार पूजा का विसर्जन , शान्ति - पाठ से होता है और शान्ति - पाठ में जब मंत्रों का उच्चारण किया जाता है , तो पवित्र जल का अभिसिंचन किया जाता है , इस प्रकार जल के बिना, किसी भी तरह की पूजा सम्भव नहीं है | वैदिक - वांग्मय में जल के महत्त्व को सर्वात्मना स्वीकार किया गया है और जल की गरिमा - महिमा का बखान , श्रुतियों में सर्वत्र किया गया है |

"रूपरसस्पर्शवत्य आपोद्रवा: स्निग्धा: | | २ | | "

वैशेषिक दर्शन , द्वितीय अध्याय, प्र.आ. जल तत्व में रूप , रस और स्पर्श , इन तीन गुणों का समावेश है | जल, स्निग्ध होने के साथ - साथ प्रवाहित भी होता है | प्रगट स्वरूप होने के कारण जल रूपवान भी है | जल को मुख में डालने पर , शीतल , गर्म , खारा एवं मधुर आदि का , रसास्वादन होने से, यह रस है | जल का स्पर्श करने पर , उसके शीत और उष्ण होने का पता चलता है इसलिए जल, स्पर्श गुण से सम्पन्न है और अग्नि तथा वायु के गुणों का सम्मिश्रण भी है | जल का उपयोग चिकित्सा के लिए भी किया जाता रहा है , जैसा कि " यजुर्वेद " में कहा गया है -

" युष्माSइन्द्रोSवृणीत वृत्रतूर्य्ये यूयमिन्द्र्मवृणीध्वं
वृत्रतूर्य्ये प्रोक्षिता स्थ | अग्नये त्वा जुष्टं
प्रोक्षाम्यग्नीषोमाभ्यां त्वा जुष्टं प्रोक्षामि |
दैव्याय कर्मणे शुन्धध्वं देवयज्यायै यद्वोSशुध्दा:
पराजघ्नुरिदं वस्तच्छु न्धामि | | १ ३ | |"

यजुर्वेद प्रथम अध्याय जैसे यह सूर्यलोक , मेघ के वध के लिए , जल को स्वीकार करता है , जैसे जल , वायु को स्वीकार करते हैं , वैसे ही हे मनुष्यों ! तुम लोग उन जल औषधि - रसों को शुद्ध करने के लिए , मेघ के शीघ्र - वेग में , लौकिक पदार्थों का अभिसिंचन करने वाले , जल को स्वीकार करो और जैसे वे जल शुद्ध होते हैं , वैसे ही तुम भी शुद्ध हो जाओ |

परमेश्वर ने सूर्य एवं अग्नि की रचना इसलिए की, कि वे सभी पदार्थों में प्रवेश कर उनके रस एवं जल को तितर - बितर कर दें ताकि वह पुन: वायुमंडल में जाकर और वर्षा के रूप में फिर धरती पर आ कर सबको शुचिता और सुख प्रदान कर सके |

"आपोSअस्मान् मातरः शुन्धयन्तु घृतेन नो घृतप्व: पुनन्तु ।
विश्व हि रिप्रं प्रवहन्ति देवीरुदिदाभ्य: शुचिरा पूतSएमि |
दीक्षातपसोस्तनूरसि तां त्वा शिवा शग्मां परिदधे भद्रं वर्णम पुष्यन् ।"
।। यजुर्वेद, ४ , २ ।।

मनुष्य को चाहिए कि जो सब सुखों को देने वाला , प्राणों को धारण करने वाला तथा माता के समान , पालन - पोषण करने वाला जो जल है , उससे शुचिता को प्राप्त कर , जल का शोधन करने के पश्चात ही , उसका उपयोग करना चाहिए , जिससे देह को सुंदर वर्ण , रोग - मुक्त देह प्राप्त कर , अनवरत उपक्रम सहित , धार्मिक अनुष्ठान करते हुए , अपने पुरुषार्थ से आनंद की प्राप्ति हो सके ।

वैदिक ऋषियों ने वैज्ञानिकों की तरह जल एवं वायु को प्रदूषण - मुक्त करने की बात कही है । यजुर्वेद में उन्होंने यह परामर्श भी दिया है कि हम वर्षा - जल को भी , किस प्रकार औषधीय गुणों से परिपूर्ण कर सकते हैं ।

" अपो देवीरुपसृज मधुमतीरयक्ष्मार्य प्रजाभ्य: ।
तासामास्थानादुज्जिहतामोषधय: सुपिप्पला: । । "
यजुर्वेद / ११ / ३८ /

राजा के पास दो तरह के वैद्य होना चाहिए । एक वैद्य , सुगन्धित पदार्थों के होम से , वायु , वर्षा - जल एवं औषधियों को शुद्ध करे । दूसरा श्रेष्ठ विद्वान् , वैद्य बनकर , प्राणियों को रोग -रहित रखे , " सर्वे भवन्तु सुखिन:" हमारा आदर्श है और इस आदर्श के निर्वाह के लिए इन दोनों दायित्वों का निर्वाह अनिवार्य है ।

वेद में मानव जीवन को ' कृषि - जीवन ' कहा गया है और इसीलिए , जलश्रोतों से हमारा रागात्मक सम्बन्ध रहा है । नदियों को हमने , देवी - स्वरूपा , माता की संज्ञा से अभिहित किया है ।' ऋग्वेद ' की इस ऋचा में ' सरस्वती ' नदी की महिमा गाई गई है -

" अम्बितमे नदीतमे देवितमे सरस्वति ।
अप्रशस्ता इव स्मसि प्रशस्तिमंब नस्कृधि ।। "
ऋग्वेद / २ / ८ / १४ /

हे सर्वोत्तम माते सरस्वती ! तू सर्वोत्तम नदी के समान है । जिन नदियों का प्रवाह प्रकट है , वे गंगा - यमुना जैसी , श्रेष्ठ नदियाँ हैं , परन्तु तेरा प्रवाह गुप्त है , इसलिए तू श्रेष्ठ्तम है । तू सभी देवताओं में श्रेष्ठ , आलोक प्रदाता है । हमारा जीवन अप्रशस्त जैसा बन गया है । हे माता ! तू उसे प्रशस्त कर । हम उपेक्षित हैं , निन्दित हैं । हे माता ! तू हमारा पथ प्रशस्त कर ।

" यस्यां समुद्र उत सिन्धुरापो यस्यामन्नं कृष्टय: संबभूवु:।
यस्यामिदं जिन्वति प्राणदेजत् सा नो भूमि: पूर्व पेये दधातु ।। "
अथर्ववेद / द्वादश - काण्डम् / ३ /

सागर ,नदी , कुआँ और वर्षा का जल तथा कृषि कार्य आदि से , जो मनुष्य , नाव , जहाज कला - यंत्र आदि का , विधेयात्मक प्रयोग करता है , वह सबको आनन्द प्रदान करता है । ऐसा व्यक्ति स्वत: भी श्रेष्ठ पद को प्राप्त करता है ।

"शं त आपो हैमवती: शमु ते सन्तूत्स्या: ।
शं ते सनिष्पदा आप: शमु ते सन्तु वर्ष्या:।। "
अथर्ववेद/ एकोनविंश काण्डम् / १ /

मनुष्य को चाहिए कि वह वर्षा , कुऑ ,नदी और सागर के जल को , अपने खान-पान , खेती और शिल्प- कला आदि के लिए उपयोग करे एवम् अपने जीवन को सम्पूर्ण बनाए और चारों पुरुषार्थों को प्राप्त करे ।

"अनभ्रय: खनमाना विप्रा गम्भीरे अंपस: ।"
भिषग्भ्यो भिषक्तरा आपो अच्छा वदामसि ।।"
अथर्ववेद / एकोनविंश काण्डम् / 3 /
विद्वान् ,जिज्ञासु , वैद आदि तपस्वी साधक , अनेक तरह के रोगों में , जल के प्रयोग के द्वारा , जल के अनन्त गुणों की आपस में व्याख्या करें और समाज के हित में उसका भरपूर उपयोग करें ।

वैदिक ऋषियों का जीवन एक प्रयोग- शाला थी । उन्होंने चिन्तन, मनन और निदिध्यासन से जो उपलब्धि हासिल की , उसे जन- कल्याण हेतु समर्पित कर दिया।

"अपामह दिव्यानामपां स्त्रोतस्यानाम् ।
अपामह प्रणेजनेSश्वा भवथ वाजिन: ॥"
अथर्ववेद / एकोनविंश / काण्डम् / 4 /

जल - चिकित्सा बहुत ही प्रभावी चिकित्सा पद्धति है , समस्त रोगों का निदान इससे सम्भव है। मनुष्य को चाहिये कि वह सागर , वर्षा , नदी , सरोवर आदि के जल को आवश्यकतानुसार चिकित्सा मे उपयोग कर के खेती के संसाधन की तरह , जल का प्रयोग करके , निरोग. वेगवान , प्रखर , एवम् बलशाली बने और समाज के हित में अपनी प्रतिभा एवम् अपने बल का समुचित उपयोग कर सके ।

"ता अप: शिवा अपोSय मं करणीरप: ।
यथैव तप्यते मयस्तास्त आ दत्त भेषजी:।।"
अथर्ववेद / एकोनविंश / काण्डम् / 5 /

जल की महत्ता के विषय में , मैं इतना ही कहना चाहती हूँ कि " जल है तो कल है " इस बात को हमारे पूर्वज , भली - भांति जानते थे और यही कारण है कि उन्होने, जल की महिमा का बखान , वेद- वांग्मय एवम् सभी धर्म- ग्रंथों में किया है । हमें जल बचाने का उपक्रम करना चाहिये । जल के महत्व को समझ कर , सावधानी - पूर्वक उसका उपयोग करना चाहिये ताकि हम अपनी भावी पीढी के लिए जल बचा कर रखें , जैसे हमारे पूर्वज हमारे लिए , जल का विशाल भंडार छोड कर गए हैं।

अपनी कविता की कुछ पंक्तियों के साथ मैं इस आलेख का समापन करती हूँ ।

जल  है  जीवन, जीवन  है  जल रे मानव मुझको पहचान
कर  मेरा उपयोग  न  अपव्यय जिससे  हो मेरा अपमान।
रख  मेरे   प्रति   देवभाव   मैं   देता  हूँ  सुखमय   जीवन
रस  बन बहता नर तन में सुख-दुख  में बनता नीर नयन ।
मैं  सबको  निर्मल करता  पर दूषित करता है  मुझे मनुज
मुझसे  ही  उसका  जीवन  है नहीं  समझता बात सहज।
यदि  मेरे शुचि  शीतल जल  का मोल न मानव समझेगा
बिजली  होगी  बंद  धरा  पर हाथ  को हाथ  न सूझेगा ।

सन्दर्भ ग्रंथ

1 वेदामृत - विनोवा
2 यजुर्वेद - दयानंद सरस्वती
3 अथर्ववेद -क्षेमकरण दास त्रिवेदी
4 वैशेषिक दर्शन - आचार्य श्रीराम शर्मा

Monday, 20 May 2013

सबकी यात्रा अपनी - अपनी

               
सबकी यात्रा अपनी - अपनी सबकी मन्जिल अपनी- अपनी
जैसी  कथनी  जैसी करनी  किस्मत सबकी  अपनी- अपनी ।

खेती  किसान करता  है जैसे सबकी  बोनी  अपनी - अपनी
पूजा की थाली  एक भले हो  भाव- भंगिमा अपनी - अपनी ।

गंगा- जल तो एक है  मगर  ग्रहण- प्रक्रिया अपनी - अपनी
'शकुन'  हंसी बट  जाती लेकिन पीडा सबकी अपनी अपनी ।

                                        शकुन्तला शर्मा , भिलाई [छ ग ]

Thursday, 9 May 2013

मोबाइल

'हलो ... हलो ... हलो ... हलो ...' हमारे पड़ोसी जैन साहब ज़ोर - ज़ोर से चिल्ला रहे थे | पूरा
मुहल्ला सुन रहा था | आखिर में खिसिया - खिसिया कर , तार - सप्तक में कह रहे थे ' हलो
हल्लो ...  हल्लो ... हल्लो ... ' और फिर  मोबाइल को , ज़ोर से जमीन पर पटक कर बोले -
'चैन हराम कर रखा है इसने | जब देखो तब ट्रिंग - ट्रिंग बजने लगता है | समय का ध्यान
ही नहीं है | इंसान क्या नहाएगा - खाएगा नहीं ? मौका देख - देख कर बजता है | मोबाइल
नाम रखा है अपना , पर मोबाइल दूसरों को बना कर रखा है | '

मैं अपने घर के बालकनी पर खड़ी थी , उनकी बातें सुन रही थी और मुझे हँसी भी बहुत आ
रही थी | मेरे मोबाइल को मेरा हँसना बिल्कुल अच्छा नहीं लगा | वह बजने लगा , मानो कह
रहा हो - 'इधर आ , मैं तुझे बताता हूँ | ' मैंने डरते - डरते  मोबाइल उठाया | मेरे मोबाइल ने
मुझे निर्देश दिया - ' दुनियाँ भर को पढ़ाती फ़िरती  है | क्या जानती है तू ? चल मोबाइल में
प्रवचन सुन | ' उसने कुछ नंबर बताया , जिसे मैं तुरंत भूल गई | मैं अपने मोबाइल को लैंड-
लाइन  की  तरह  यूज  करती  हूँ , कुछ  नहीं जानती | आपको सच बताऊँ ? मैं मोबाइल से
 डरती हूँ | मोबाइल बॉस जैसा  लगता है | पता नहीं किस समय बज जाए और  क्या निर्देश
 मिल जाए | मोबाइल की महिमा  अपरम्पार है | ये जो न करे कम है | मेरा  मोबाइल फ़िर
बज रहा है -' हाँ , हैलो ! सुनिए बहन जी ! आपके यहाँ लाइट है क्या ? '

'हाँ जी , है | '
'और पानी ?'
'हाँ जी ! पानी भी है | '
'हाय कितना अच्छा है न ! हमारे शिमले में तो पानी जम गया है , आप कहाँ पर रहती हैं ?'
'जी ! मैं पद्मनाभपुर , दुर्ग में रहती हूँ | '
'बहन जी ! ये कौन सा स्टेट है जी ?'
'जी ये छत्तीसगढ़ है | '
'अच्छा - अच्छा वही छत्तीसगढ़ जहाँ आदिवासी रहते हैं ?'
'जी हाँ आपने ठीक पहचाना , वही छत्तीसगढ़ है | '
'क्या आप भी आदिवासी हो ?'
'जी नहीं ! मेरे ऐसे भाग्य कहाँ ?'
'बहन जी ! आप तो मज़ाक करते हो | '

मेरा मोबाइल गर्म हो चुका था और मेरा कान जल रहा था | लगता है कान और माथा का
कोई भीतरी सम्बन्ध है क्योंकि मेरा माथा भी गरम हो गया था | मोबाइल थककर लस्त
पड़ गया था , भूखा था , चुप हो गया | मैंने उसे भोजन करने के लिए छोड़ दिया , चार्जिंग
में डाल दिया | जैसे ही पेट में कुछ गया , वह छाती पर मूँग द्लने के लिए फिर  तैयार हो
गया | मोबाइल  बजने लगा | मैं दौड़कर , उसकी सेवा में पहुँची |  ईश्वर का  लाख - लाख
शुक्र कि इस बार फ़ोन मेरी फ्रेंड  सरला शर्मा  का था | सरला  ने कहा  - 'का करत  हस रे
शकुन ! सुन न ! मुनगा - बरी के साग  रांधे हौं अऊ  चीला  बनाय  हौं , झट के आ , दुनों 
झन खाबो | '

बात  करके  अभी  मोबाइल रखने ही  वाली  थी कि वह  फ़िर बजने लगा | मैंने  उठाया -
'हैलो ।' दूसरी ओर से मुझे किसी ने चमकाया - 'क्या समझते हो अपने आपको ? सुनील
से बात कराओ | रांग नंबर बोलकर फ़ोन काटना नहीं , समझे न !' मैं काटो तो खून नहीं
अब कहाँ से सुनील लाऊँ ? मैं रुआँसी होकर बोली - 'देखो भैया! यह सुनील का मोबाइल
नहीं है , यहाँ कोई सुनील नहीं रहता | '

पता  नहीं  क्या बोलेगा , इस  डर से मैंने  मोबाइल  को टेबल  पर रख  दिया | अब  मैंने
निश्चय  कर लिया  कि  मैं अपने  पास  मोबाइल  नहीं  रखूँगी | मैं  परेशान हो चुकी थी |
मोबाइल फ़िर बजने लगा | मैं आपे से बाहर हो चुकी थी | मैं मोबाइल  उठाई  और  मैंने
चिल्ला - चिल्ला कर कहा - 'देखिए भाई साहब ! आप जो भी हों , मैं  आपसे कोई  बात
नहीं करना चाहती और यदि फ़िर आपने मुझसे बात करने की कोशिश की तो मैं पुलिस
में कम्प्लेन कर दूँगी , समझे आप ? '

'क्या हो गया बेटा ! किस पर बिफर रही हो ?' मैं चौंकी , यह तो मेरे चाचा जी की आवाज
है | ' चाचा जी कह रहे थे - 'हमने सोचा कि शकुन को सरप्राइज दिया जाए | देख बेटा! तू
नीचे तो देख | ' मैंने बालकनी से देखा , चाचा - चाची मुस्कुराते हुए  गाड़ी से नीचे  उतर
रहे थे और मैं शर्म से पानी - पानी हो रही थी |

                                               शकुन्तला शर्मा , भिलाई [छ ग ]

Saturday, 4 May 2013

संस्कृत से अनुप्राणित छत्तीसगढ़ी का शब्द सामर्थ्य

इतिहास इस बात का साक्षी है कि संस्कृत सभी भाषाओँ की जननी है | यही कारण है कि चाहे
वह अंग्रेजी हो , लैटिन हो , फ्रेंच हो , स्पैनिश हो , जापानी हो या उर्दू , अरबी , फ़ारसी हो ,
विश्व की सभी भाषाओँ में , संस्कृत भाषा की मूल धातुओं से बने शब्द , आज भी विद्यमान हैं |
अंग्रेज़ी में एक शब्द है OMNI - POTENT , यदि आप किसी अँगरेज़ से पूछेंगे कि इस शब्द
की उत्पत्ति कैसे हुई , तो वह नहीं बता पाएगा क्योंकि यह 'ओम' शब्द से बना है | जिसका
अर्थ है "सर्व - शक्तिमान " एक शब्द और है - OMNI- PRESENT यह शब्द भी 'ओम ' से ही
बना है और इसका अर्थ है -"सर्व - व्यापक | " इसी प्रकार उर्दू , अरबी और फारसी का एक
शब्द है - 'नमाज़ ' ,  जो संस्कृत के 'नम ' धातु से बना है , जिसका आशय है , नमस्कार
करना | उर्दू , अरबी और फ़ारसी में , पूजा - प्रार्थना करने की प्रक्रिया का नाम ही 'नमाज़ '
है | दूसरों की भाषा सीखना और उसे अपना लेना , मानव की स्वाभाविक प्रवृति होती है |
अँगरेज़ भी इससे अछूते नहीं रहे , उन्होंने छत्तीसगड़ही के अनेक शब्दों को सीखकर अपनी
भाषा को समृद्ध बनाने का , भरपूर प्रयास किया | जैसे - लाइक - LIKE, कप - सासर ,
CUP- SAUCER, टिप - TIP,  जिनिस - JEANS,  सिरतोन - CERTAIN, नोहय - NO .

विश्व की अन्य भाषाओँ की तरह छत्तीसगढ़ी में भी , संस्कृत के शब्दों का बाहुल्य है और
यह कोई अचरज की बात भी नहीं है | बिटिया में , महतारी के गुण - संस्कार तो रहेंगे ही
और यही संस्कार , उनके अलंकरण भी बन जाते हैं | छत्तीसगढ़ी बहुत समृध्द भाषा है |
इसमें प्रणय एवं प्रणव , दोनों का चरमोत्कर्ष है | जहाँ बिहाव - गीत , चंदैनी , सोहर ,
ददरिया , देवार - गीत ,सुआ गीत  और फाग  गीत प्रणय को परिभाषित करते हैं , वहीं
करमा , जसगीत , भोजली , भरथरी , पंडवानी , पंथी , चौका [कबिरहा लोक भजन ]
डंडा- गीत, गौरा गीत  आदि लोक गीतों में प्रणव की महिमा गाई गई है | छत्तीसगढ़ी
यदि मुंदरी है , तो संस्कृत उस मुंदरी में जड़ा हुआ नग है , जो उसकी सुन्दरता में चार
चाँद लगा रहा है | आइये हम एक - एक शब्द के अर्थ और उसकी व्याख्या पर विचार
करते हैं |

सर्वप्रथम हम ' दायी '  शब्द के विषय में सोचते हैं | 'दायी ' शब्द 'दा' धातु से बना है
जिसका अर्थ है देना | 'दायी ' शब्द संस्कृत के 'दायिनी ' शब्द का अपभ्रंश है |' दायिनी '
शब्द का अर्थ है - देने वाली | छत्तीसगढ़ी में माता को 'दायी ' कह कर पुकारने की
परम्परा है , जो श्रुतियों की "मातृदेवो भव " की परम्परा को परिपुष्ट करती है |

संस्कृत में एक शब्द है - 'तस्मै ' , जिसका अर्थ है 'उसके लिए ' छत्तीसगढ़ी में 'तस्मै '
का अर्थ 'खीर '| अब प्रश्न यह उठता है कि खीर किसके लिए बनती है ? उत्तर है उस
ईश्वर के लिए | प्रश्न पुन: उत्थित होता है कि वह ईश्वर कौन है ? इसका जवाब है कि
मैं ही ईश्वर हूँ |" अहं ब्रम्हास्मि "   की शैली में 'तस्मै ' का भोग लगता है | 'तस्मै '
शब्द बार - बार यह स्मरण दिलाता है कि हमारे भीतर वह ईश्वर विद्यमान है | "अहं
ब्रम्हास्मि " का पर्यायवाची शब्द , छत्तीसगढ़ी में "मैं हर " और "तत्वमसि " का
पर्यायवाची शब्द " तैं हर ", प्रयुक्त होता है | इतना ही नहीं ए हर , ओ हर , रुख हर ,
नदिया हर , पहाड़ हर , गाय हर , बैला हर , खेत हर ,खार हर अर्थात ," कण - कण
में  भगवान " का जो दर्शन है , वह छत्तीसगढ़ की संस्कृति में साफ - साफ झलकता
है |

आइये हम यह जानने की चेष्टा करें कि छत्तीसगढ़ी में , संस्कृत के कौन - कौन से
शब्द आज भी विद्यमान हैं |

संस्कृत                       छत्तीसगढ़ी                             हिन्दी
अमृत                         अमृत                                   अमृत
अजर                          अजर                                   अजर
अमर                          अमर                                    अमर
अहं ब्रम्हास्मि             मैं हर                                  मैं ब्रम्ह हूँ 
अंगुष्ट                        अँगठा                                  अँगूठा 
अमावस्या                 अमावस                               अमावस्या 
अपयश                      अपजस                               अपयश
अक्षर                         आखर                                 अक्षर
अहंकार                      अहंकार                               अहंकार 
अर्पित                        अर्पित                                 अर्पित
आशीष                      असीस                                 आशीष
अनन्त                      अनन्त                                अनन्त 
अस                          अस , असन                          होना
अग्नि                       आगी                                   आग 
आत्मा                      आत्मा                                आत्मा 
आषाढ़                      आसाढ़                                आषाढ़
आम्र                          आमा                                  आम
अम्ल                         अमली , अम्मठ                  अम्ल
अपमान                     अपमान                              अपमान
आशा                          आस                                   आशा
उदार                           उदार                                  उदार
उज्ज्वल                      उज्जर                               उज्ज्वल
एहिभांति                    एहवाती                              इसी तरह
कुटुम्ब                         कुटुम                                कुटुम्ब
कृपा                             कृपा                                  कृपा
का                               का                                       क्या
कटु                              करू                                     कटु
कपाल                          कपार                                 कपाल
केश                             केश                                     केश
कूष्मांड                        कोंहड़ा                                कुम्हड़ा
काल                            काल                                   काल
कर्म                             करम                                  कर्म
कुकर्म                          कुकरम                               कुकर्म
कन्या                           कइना                                कन्या
काष्ठ                             कठवा                                 लकड़ी
कुशल                           कुशल                                 कुशल
कुल                              कुल                                     कुल
कीट                              कीरा                                  कीड़ा
कंठ                               कंठ                                   कंठ
गरीयस                         गरीयस                             आत्मीय
गणना                            गिनती                             गणना
गणेश                             गनेश                                गणेश
गणपति                         गणपति                            गणपति
गर्व                                गरब                                   गर्व
गन्तव्य                          गन्तब                              गन्तव्य
गर्भिणी                           गाभिन                              गर्भिणी
गतं                                 गईस                                 गया
गीत                                गीत                                   गीत
गुरु                                  गुरु                                    गुरु
ग्रहण                              गरहन                               ग्रहण
गोरस                              गोरस                                गोरस
गोचर                              गोचर                                गोचर
गोवर                               गोबर                                गोबर
ग्राम                                गाँव                                   गाँव
गोत्र                                 गोत्र                                    गोत्र
गौ                                    गौ                                      गाय
गंध                                  गंध                                     गंध
घड़ी                                  घड़ी                                     घड़ी
घृत                                   घी                                       घी
घृतकुमारी                      घिकवार                             घृतकुमारी
घंटी                                 घंटी                                    घंटी
चर                                  चर                                      चर
चरित                             चरित                                   चरित
चैत्र                                 चैत                                       चैत्र
चंद्र                                चंदा                                      चन्द्रमा
चंदन                             चंदन                                    चंदन
चंचल                            चंचल                                     चंचल
च                                    च                                           च
चौर                                चोट्टा                                   चोर
छाया                             छाया                                    छाया
छतरी                             छाता                                   छतरी
जीव                                जीव                                    जीव
जन्म                              जनम                                 जन्म
जीत                                जीत                                    जीत
जीवन                             जीवन                                  जीवन
जगत                              जगत                                   जगत
ज्वर                                जर                                       ज्वर
परलोक                           परलोक                               परलोक
परवश                             परबस                                 परवश
परदेश                              परदेस                                परदेश
पथ्य                                 पथ                                    पथ्य
पक्ष                                  पाख                                   पक्ष
पर                                   पर                                      पर
पर्ण                                 पान                                     पत्ता
पत                                  पत                                       पत
पिपासा                           प्यास                                  प्यास
परिपूर्ण                       परिपूरन                              परिपूर्ण
पितृ                             पितर                                  पूर्वज
प्राण                             प्रान                                    प्राण
पार्षद                          पारखत                               पार्षद
पुण्य                            पुन                                     पुण्य
प्रजा                            परजा                                  प्रजा
पादुका                        पनही                                  पादुका
पाप                             पाप                                    पाप
पिण्ड                          पिण्ड                                  शरीर
पुरोहित                    उपरोहित                            पुरोहित
प्रेत                             प्रेत                                     प्रेत
प्रतीत                       परतीत                              प्रतीत
प्रलय                        परलय                              प्रलय
पंचपात्र                     पंचपात्र                             पंचपात्र
पण्डित                     पण्डित                             पण्डित
पीड़ा                          पीरा                                   पीड़ा
पूजा                         पूजा                                    पूजा
फल                          फर                                      फल
फलाहार                   फरहार                               फलाहार
फण                          फन                                     फण
बधिर                       भैरी                                      बहरी
बंशी                         बंसी                                   बाँसुरी
बदरी                       बोईर                                     बेर
बुद्धि                         बुद्धि                                    बुद्धि
बीजं                         बीज                                   बीज
बाल                          बाल                                  बालक
बाण                          बान                                   बाण
बंधन                        बंधन                                  बंधन
बलिवर्द                     बैला                                    बैल
भगवन                     भगवान                             भगवान
भक्त                           भगत                                भक्त
भगिनी                      बहिनी                               बहन
भूत                            भूत                                   भूत
भ्रम                            भरम                                 भ्रम
भाषा                           भाखा                              भाषा
भूषण                         भूखन                              भूषण
भूमि                           भुइयाँ                             भूमि
भाग्य                          भाग                              भाग्य
भज                            भज                                भज
भास                           भास                             आभास
मम                            मोर                                मेरा
महाजन                   महाजन                         महाजन
मर्म                            मरम                            मर्म
मत्स्य                        मछरी                         मछ्ली
मदारि                        मदारी                         मदारी
मन                             मन                             मन
मति                            मति                            मति
मनसा                         मनसा                         मनसा
मसि                             मस                            स्याही
मानुष                          मनखे                          मनुष्य
मेघ                              मेघ                             मेघ
मुनि                            मुनी                              मुनि
मातरि                        महतारी                          माता
मुहूर्त                          मुहुरुत                           मुहूर्त
मिश्र                           मिसिर                          मिश्रा
महिमा                        महिमा                         महिमा
मान                             मान                             मान
मूल                               मूल                            मूल
मंत्र                               मंत्र                              मंत्र
मुख                              मुँह                              मुख
मोक्ष                              मोक्ष                           मोक्ष
मोह                               मोह                             मोह
मौन                               मौन                            मौन
मूषक                            मुसवा                           चूहा
तन                                तन                              तन
तप                                 तप                               तप
तव                                  तैं                                 तुम
तडाग                            तलाव                          तालाब
तन्मय                           तन्मय                        तन्मय
तर्पण                              तरपन                        तर्पण
तत्वमसि                        तैं हर                         तुम वही हो
ततो                                तव                            तो , तब
तत्काल                          तुरते                          तुरंत
तपस्या                           तपस्या                      तपस्या
तत्र                                 ऊहाँ                           वहाँ
तान                                तान                           तान
तारणहार                        तारनहार                     तारणहार
तंत्र मंत्र                           तंत्र मंत्र                       तंत्र मंत्र
ताण्डव                             तांडव                         ताण्डव
तैलं                                  तेल                            तेल
तृष्णा                             तृष्णा                          तृष्णा
तिलांजलि                      तिलांजलि                    तिलांजलि
दम                                 दम                             दम
दर्पण                              दर्पण                           दर्पण
दधि                                दही                             दही 
दरिद्र                              दरिदर                         दरिद्र
दर्शन                              दर्शन                           दर्शन
दक्षिणा                           दक्षिणा                        दक्षिणा
दान                                 दान                             दान
दिवस                              दिन                              दिन
दुग्ध                                दूध                               दूध
दुष्काल                           दुकाल                           दुष्काल
देवालय                           देवाला                           देवालय
दीप                                 दिया                             दीपक
दुःख                               दुःख                               दुःख
दुष्ट                                 दुष्ट                                 दुष्ट
दंत                                 दांत                                दांत
दाडिमी                         दरमी                                अनार
ध्यान                           ध्यान                                ध्यान
धन                               धन                                   धन
धन्य                            धन्य                                  धन्य
धान्य                           धान                                  धान्य
धिक्                           धिक्कार                             धिक्कार
धरती                          धरती                               धरती
धर                             धर                                    धारण करना
धीर                            धीर                                  धीर
न                               नहीं                                  नहीं
नदी                           नदिया                              नदी
नख                            नख                                 नाखून
नव                             नवा                                 नया
नाम                           नाव                                  नाम
नग्न                           नंगरा                               नंगा
नमो                            नमो                                नमस्कार
नवा                            नवा                                  नया
नर्क                           नरख                                 नर्क 
नितांत                      नितांत                              नितांत
नारायण                    नारायन                           नारायण
नोहय                        नोहय                               नहीं
नासिका                     नाक                                नाक
नहि                           नहिं                                 नहीं
निंदा                          निंदा                                निंदा
नृसिंह                        नरसिंह                           नरसिंह
यत्न                            जतन                              यत्न
यश                             जस                                यश
यम                             जम                                यम
योनि                           जोनि                             योनि
यमुना                          जमुना                          यमुना
यज्ञ                             जज्ञ                              यज्ञ
रम्या                           रमनीक                      रमणीक
रात्रि                            रात                             रात
रक्षा                            रक्षा                             रक्षा
राक्षस                        राक्षस                            राक्षस
रोम                            रुआं , रोम                    रोम
रथ                              रथ                              रथ
राजा                            राजा                            राजा
रानी                            रानी                              रानी
राग                             राग                             राग
रास                            रास                              रास
रिद्धि                           रिद्धि                            रिद्धि
लक्ष्मी                        लछमी                        लक्ष्मी
लवण                          नून                            नमक
लग्न                           लगन                         लग्न
लक्ष                             लाख                          लाख
ललना                         ललना                         नारी
लज्जा                          लाज                           लज्जा
लवँग                           लवांग                          लवँग
लंब                               लम्मा                         लंबा
लंघन                           लाँघन                         भूखा
लाल                             लाल                           बेटा
वन                               बन                              बन
वर्ष                              बरिस                            वर्ष
वचन                           बचन                         वचन
वर्जना                         बरजना                       वर्जना
वज्र                             बज्र                             वज्र
व्रत                             बरत                            व्रत
वर्ण                            बरन                             वर्ण
वाणी                          बानी                            वाणी
विदा                           बिदा                            विदा
वीर                             बीर                              वीर
विष                            बिख                             विष
विषय                         बिषय                            विषय
विकार                        बिकार                           विकार
वट                              बर                                वट
विकराल                     बिकराल                         विकराल
वृक्ष                            रुख                                वृक्ष
विवाह                        बिहाव                             विवाह
विश्वास                       बिश्वास                           विश्वास
विलंब                         बिलंब                             विलंब
विद्या                          बिद्या                               विद्या
वेद                             बेद                                 वेद
वैरी                             बैरी                                वैरी
वैशाख                       बैसाख                             वैशाख
वैकुण्ठ                       बैकुण्ठ                            वैकुण्ठ
वीणा                          बीना                               वीणा
वंदना                         बंदना                              वंदना
वेला                            बेला                               वेला
सदा                            सदा                               सदा
सत्य                          सच                                सत्य
सर्वदा                      सरबदा                             सर्वदा
सम्मान                   सम्मान                          सम्मान
सहित                      सहित                              सहित
सर्वत्र                       सबो जगह                         सर्वत्र
समधी                      समधी                              समधी
सपत्नी                       सौत                               सपत्नी
सहोदरा                    सहोदरा                           सहोदरा
सत                          सत                                 सत
स्मरण                     सुमिरन                           स्मरण
स्वर्ण                        सोन                                स्वर्ण
स्वागत                     सुआगत                          स्वागत
सार                           सार                                 सार
साधु                          साधू                                साधू
साक्षात्                     छातछात                          साक्षात्
संग                           संग                                   संग
संतान                        संतान                            संतान
संकट                        संकट                              संकट
संतोष                        संतोष                             संतोष
सुआसीन                   सुआसीन                       सधवा
संवत्सर                    बछर                               वर्ष
संसार                        संसार                          संसार
संध्या                        सँझा                            संध्या
सूर्य                           सुरुज                           सूर्य
शाक                         साग                              सब्जी
शोक                         शोक                             शोक
शुक्ल                        सुकुल                           शुक्ला
शिव                          शिव                              शिव
शठ                           शठ                              मूर्ख
शुभ                          शुभ                             शुभ
षट                           छठ                             षष्ठी
षडानन                   खडानन                       कार्तिकेय
होलिकोत्सव             होरी                             होली
हरित                      हरियर                           हरा
हास                        हांसी                              हँसी
हरि                         हरि                                हरि
हन                        हन                         समाप्त करना
हर                         हर                                  शिव
क्षत्रिय                  खत्री                              क्षत्रिय
क्षमा                     छमा                            क्षमा
त्रिदेव                 त्रिदेव                              त्रिदेव
त्राहि - त्राहि         त्राहि-त्राहि                  त्राहि-त्राहि
ज्ञान                    ज्ञान                             ज्ञान

                                          शकुन्तला शर्मा , भिलाई [छ ग ]     

  







Wednesday, 1 May 2013

माटी की महिमा

जल से जीवन है |
धरती पर लगभग तीन भाग जल है , एक भाग थल है |
मानव देह में भी जल का अनुपात अधिक है
याद कीजिए ,
जेठ के महीने में , ठंडे पानी के लिए
आप किस तरह व्याकुल हो उठते हैं और
फ्रिज के पानी से आपकी प्यास नहीं बुझती
क्योंकि फ्रिज के पानी में वह मिठास कहाँ ,
जो मिट्टी की गागर में है |

माटी की सोंधी - सोंधी महक लिए
गागर के जल की मिठास के क्या कहने !
आप मन ही मन प्रतीक्षा करते रहते हैं
उस गागर वाली के आगमन की |

तेज धूप के थपेड़ों को चीरती हुई
आठ - दस गागर को धागे में गूंथकर
टोकनी में सहेजकर , सिर पर रखकर
जब वह - "घड़ा ले ल ओंSSSS " कहती हुई
आपकी गली में जैसे ही आती है
आप लपककर उसके पास जाते हैं ,
उससे पूछते हैं -
 "एक ठन घड़ा कतका के ए ओं ? "
 "एक कोरी के तो ए साहेब | "
"दस रुपिया लगा , दू ठन लेहौं | "
"नई परय साहेब | "
"चल चार ठन लेहव , दस रुपिया लगा ले | "
"नई पोसावय साहेब | "
कहती हुई वह चली जाती है |

आप सोचते क्यों नहीं ?
इस तपती गर्मी और धूप में ,
सिर पर इतना बोझा बोहकर , वह खड़ी है
उसे भी बहुत प्यास लगी है
पर उसकी हालत
"धुबिया जल बिच मरत पियासा "
जैसी है
और आप हैं कि मोल - भाव किए जा रहे हैं

कहाँ उसकी मेहनत की गागर
स्वत: में सागर समेटे हुए ,
उसकी श्रम की साधना और माटी का मोल
दस रुपिया लगाते हुए
क्या आपको अपराध - बोध नहीं होता ?

               शकुन्तला  शर्मा , भिलाई [छ ग ]