Monday, 20 October 2014

दिये जलाओ ज्योतिर्मय

फोडो न  पटाखे  दीवाली  में  दिये जलाओ ज्योतिर्मय
ये वातावरण प्रदूषित करते दिये जलाओ ज्योतिर्मय ।

वायु -  प्रदूषण  ध्वनि - प्रदूषण मृदा प्रदूषित करते हैं
जल  भी  होता  मैला इससे दिये जलाओ ज्योतिर्मय ।

लक्ष्मी जी को नहीं ज़रूरत ऐटम - बम फुलझडियों  की
मंत्रोच्चार करो सुन्दर तुम  दिये  जलाओ ज्योतिर्मय ।

पटाखे अहंकार  के  सूचक  यह  ईर्ष्या - द्वेष  बढाता  है
छोडो इन्हें  त्याग दो  भाई  दिये  जलाओ  ज्योतिर्मय ।

पटाखों  की  फैक्ट्री  में  देखो बच्चों  का  शोषण होता है
'शकुन'  रिहाई  हो बच्चों की दिये जलाओ ज्योतिर्मय ।

4 comments:

  1. सुंदर प्रेरणा देती पंक्तियाँ...

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  2. दीपावली की ज्योतित रश्मियाँ आपके जीवन को समग्रतः आलोकित करे!

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी है और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - मंगलवार- 21/10/2014 को
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः 38
    पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें,

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  4. Sunder seekh deti rachna...umda prastuti....deewali ki shubhkamnaayein...

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